सतना में नकली पटवारी पकड़ा:पटवारी बन कर युवक ने 4 भाइयों को ठगा, वकील ने खोली पोल

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सतना जिले नकली पटवारी बनकर 4 भाइयों को ठगने का मामला सामने आया है। जिसे ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। जिला मुख्यालय के पास सोहौला गांव में एक शातिर युवक पटवारी बनकर आया। यहां उसने गांव के एक युवक को बुलाया और कहा कि तुम और तुम्हारे अन्य 3 भाइयों के खिलाफ जमीन के मामले में सम्मन है। पटवारी ने युवक को नकली दस्तावेज दिखाए और उससे ढाई हजार रुपए ऐंठ लिए। दरअसल वह चारों भाइयों से 3-3 हजार रुपए वसूलने के इरादे से गांव आया था। इसी लालच ने उसकी सारी पोल खोल कर रख दी और वह पकड़ा गया।

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सोहौला गांव के रहने वाले रामहेत सिंगरहा सोमवार को बकरियां चराने गए हुए थे। तभी उसके पास धीरेंद्र कुमार बागरी आया और स्वयं को पटवारी बताते हुए कहा कि उसके और उसके अन्य तीन भाइयों के खिलाफ जमीन के मामले में सम्मन है। वह उन चारों भाइयों को बंद करा देगा। रामहेत यह सुनकर डर गया और उससे आरजू-मिन्नतें करने लगा।

कागज और नक्शा देकर 3-3 हजार की मांग की

धीरेंद्र ने रामहेत को एक कागज और नक्शा थमाया और कहा कि अगर चारो भाई उसे 3-3 हजार रुपए देते हैं तो वह उन्हें बचा सकता है। रामहेत ने इतनी रकम दे पाने में असमर्थता जताई तो धीरेंद्र ने उससे फिलहाल ढाई हजार का बंदोबस्त करने को कहा और बाकी पैसे अपने भाइयों से बात कर देने को कहा। धीरेंद्र ने रात में ही रामहेत को पहले कलेक्ट्रेट और फिर कोतवाली बुलाया।

वकील ने खोली पोल

डरे सहमे रामहेत ने सेमरिया चौक पर सिंघाड़ा बेचने वाली अपनी पत्नी से 1 हजार रुपए लिए और युवक को दे दिए। बाकी डेढ़ हजार रुपए युवक ने किओस्क के जरिए अपने खाते में डलवाए। रामहेत ने घर में अपने भाइयों को पूरी बात बताई। जिसके बाद चारो भाई मंगलवार को तथाकथित पटवारी के दिए कागज लेकर वकील के पास पहुंचे। कागज और नक्शा देखते ही वकील की समझ में आ गया कि किसी ने रामहेत और उसके भाइयों को ठगी का शिकार बनाया है। वकील के बताने के बाद रामहेत ने गांव पहुंच कर अन्य ग्रामीणों को जानकारी दी। नकली पटवारी को बकाया रकम लेने के लिए बुलाया गया। रामहेत ने जब युवक से बकाया रकम देने के लिए संपर्क किया तो उसने उन्हें जिला अस्पताल बुला लिया। जहां रामहेत और अन्य ग्रामीणों ने नकली पटवारी को पकड़ लिया।

लोगों की पूछताछ से घबराया

जब उससे लोग पूछताछ करने लगे तो वह उन्हें बरगलाने लगा। कभी अपना नाम अरविंद तो कभी पुष्पेंद्र बताने लगा। हालांकि उसके पास से उसके संबल कार्ड की फोटो कॉपी मिली जिसमे उसका नाम धीरेंद्र कुमार बागरी पिता सौखी लाल बागरी निवासी सेमरिया करसरा दर्ज था। वह नगद लिए 1 हजार रुपए भी देने को तैयार हो गया लेकिन खाते में लिए 1500 रुपयों की बात टालता रहा। घंटों चली कवायद के बाद देर शाम ग्रामीण उसे पकड़ कर सोहावल पुलिस चौकी ले गए।

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