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जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा शुरू

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रायगढ़  जून । परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 27 जून से 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, इन कार्यक्रमों को दो पखवाड़े में मनाया जाएगा। प्रदेश में इसे 27 जून से शुरू किया गया पर रायगढ़ में 24 जून से आरंभ हो गया है। 24 जून से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम के दो हिस्से- दम्पत्ति सम्पर्क पखवाड़ा और जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के रूप में मनाया जाएगा।

पहले पखवाड़े को 24 जून से 10 जुलाई तक दम्पत्ति सम्पर्क पखवाड़ा के रूप में मनाया जाएगा जिसमें एएनएम और मितानिन द्वारा घर-घर सम्पर्क स्थापित कर लक्ष्य दम्पत्ति से संपर्क कर सर्वे किया जाएगा। इसमें हितग्राहियों को चिन्हित कर उन्हें स्थाई एवं अस्थायी परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिये प्रेरित किया जाएगा। साथ ही ग्राम स्तर पर नए अस्थाई परिवार नियोजन साधनों के बारे में चर्चा हेतु सास बहू सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में गर्भनिरोधक साधनों जैसे अंतरा एवं छाया के बारे में विशेष रुप से जानकारी दी जाएगी। इस कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में 11 जुलाई से 27 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा आयोजित होगा जिसमें चिन्हित हितग्राहियों को परामर्श एवं परिवार नियोजन की सेवाएँ दी जाएंगी। इस दौरान पुरुष नसबंदी पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।

इस पखवाड़े के दौरान स्वास्थय केन्द्रों पर कंडोम बॉक्स ‘भी रखे जायेगें जिसमें से लोग बिना झिझक के निशुल्क कंडोम प्राप्त कर सकेंगे|

इस बारे में मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ.एसएन केसरी ने बताया: “जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूक करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जाएगा। इसमें उन दंपति को लक्ष्य के रूप में रखा जाएगा, जिन्होंने अभी-अभी संतान हुयी हैं। इनको अस्थाई तौर पर गर्भनिरोधक और परिवार पूरा होने पर नसबंदी जैसे परिवार नियंत्रण उपायों की जानकारी दी जाएगी।”

स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण इकाई के परिवार नियोजन अधिकारी डॉ राजेश मिश्रा ने बताया: “कोविड के समय में भी जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए वृहद कार्यक्रम चलाए गए थे। अब इस साल हमनें 27 की बजाए 24 जून से है पखवाड़े की शुरुआत जागरूकता रथ निकालकर की है। इस बार और सक्रियता से इसे मनाया जा रहा है क्योंकि अभी कोविड संक्रमण दर कम है। इस बर पखवाड़ा “परिवार नियोजन का करो उपाय, लिखो तरक्की का नया अध्याय” के थीम पर मनाया जा रहा। ”

राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार परिवार नियोजन को लेकर किये जा रहे तमाम जतन का प्रभाव भी इस बार देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के द्वारा परिवार नियोजन के संबंध में ऐसे लोगों से संपर्क किया गया जो इसके बारे जानते नहीं थे। यह दर 12.6 प्रतिशत से बढ़कर 38.4 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वर्तमान में परिवार नियोजन के लिए विविध प्रकार के साधनों का प्रयोग कर रहे 89.2 प्रतिशत लोगों ने इसके साइड इफेक्ट के बारे में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बताया जो पहले 32.8 प्रतिशत था।

जनसंख्या स्थिरीकरण में हो रहा सुधार
जनसंख्या स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कारक कन्ट्रासेप्टिव प्रिवलेंस रेट यानि गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग की दर में भी वृद्धि हुई है और यह एनएफएचएस-4 (2015-16) में 52.3% से बढ़कर एनएफएचएस-5 (2020-21) 64.1% हो गई है। एनएफएचएस 4 में जहां आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों का 49 % उपयोग हो रहा था वहीँ एनएचएफएस-5 में यह आंकड़ा बढ़कर 56% हो गया है। एन एफ एच एस-5 से यह भी पता चलता है कि गर्भनिरोधक साधनों की कमी की दर में भी कमी आई है। यह 13.1 % से घटकर 10.3 % पर आ गयी है। यह दर ऐसे योग्य दम्पत्तियों की दर को दर्शाती है जिनको गर्भनिरोधक साधनों की जरुरत है और वह उनको अपनाना भी चाहते हैं किन्तु उनकी पहुँच गर्भनिरोधक साधनों तक नहीं है।

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