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satna :मैडम कलेक्टर का ये रूप ….देखते ही रह गए लोग,देखिये वीडियो

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satna: devotion to power, this form of madam collector .... people were left on seeing

मैडम कलेक्टर का ये रूप ….देखते ही रह गए लोग

धर्म पत्नी के साथ दुर्गा पूजा में शामिल होने अचानक काली बाड़ी पहुंचे कलेक्टर,मैडम कलेक्टर ने निभाई सिन्दूर खेला की रस्म ,हाथों में जलता खप्पर लेकर ढाक की धुन पर किया नृत्य 

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सतना। जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी यानी कलेक्टर और उनकी धर्मपत्नी का एक और ऐसा रूप दुर्गा पूजा के मौके पर सामने आया जिसने उनके भक्ति भाव से लोगों को परिचित कराया। बंगाली समाज के आयोजन में कलेक्टर अजय कटेसरिया और मैडम कलेक्टर ने माता रानी के चरणों में आस्था समर्पित करते हुए पूजा अर्चना की। मैडम कलेक्टर ने यहां पारम्परिक सिन्दूर खेला रस्म में हिस्सा लिया और ढाक की धुन पर पारम्परिक खप्पर नृत्य भी किया। मैडम कलेक्टर का यह रूप जिसने भी देखा ,देखता ही रह गया। हाथ में जलता हुआ खप्पर लेकर वो ऐसे झूमीं कि वहां मौजूद बंगाली समाज की महिलाएं भी उनके भक्ति भाव और प्रतिभा की कायल हो गईं। मैडम कलेक्टर के साथ उनकी मां भी थीं।satna: devotion to power, this form of madam collector .... people were left on seeing

 

बंगाली समाज और परम्पराओं से पुराना नाता 

बता दें कि मैडम कलेक्टर यानी श्रीमती शुभम प्रिया कटेसरिया पश्चिम बंगाल के आसनसोल की हैं। बंगाली समाज के साथ उनका जुड़ाव पुराना है। वे बांग्ला भाषी भी हैं और बंगाल में मनाये जाने वाले पारम्परिक पर्वों तथा वहां की रीतियों से भी बखूबी परिचित हैं। सिर्फ मैडम ही नहीं कलेक्टर अजय कटेसरिया का भी बंगाल से पुराना नाता है। उनका ननिहाल पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के ग्राम जामुड़िया में है। श्री कटेसरिया भी बचपन से ही बंगाली समाज के दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल होते आये हैं। सतना में काली बाड़ी दुर्गा पूजा उत्सव बंगाली समाज द्वारा मनाये जाने की जानकारी मिली तो कलेक्टर श्री कटेसरिया अपनी धर्मपत्नी श्रीमती शुभमप्रिया कटेसरिया तथा अपनी सासु मां के साथ दुर्गा पूजा में शामिल होने पहुंच गए। अचानक कलेक्टर को सपरिवार वहां पारम्परिक परिधानों में मौजूद देख कर काली बाड़ी में उपस्थित श्रद्धालुओं की खुशी दो गुनी हो गई। श्री कटेसरिया ने बताया कि वे बचपन से ही दुर्गा पूजा में सपरिवार शामिल होते रहे हैं।satna: devotion to power, this form of madam collector .... people were left on seeing

पूजन आरती कर लिया आशीर्वाद

बंगाली समाज द्बारा आयोजित इस कार्यक्रम में कलेक्टर अजय कटेसरिया सपरिवार शामिल हुए और उन्होंने माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। मां काली और भगवान शिव के मंदिर में भी सपरिवार पूजन आरती की। श्रीमती शुभमप्रिया कटेसरिया एवं उनकी माँ ने सिदूर खेला रस्म में शामिल होकर खप्पर के साथ नृत्य करते हुए माँ की आराधना की। उन्होंने माता रानी को सिन्दूर अर्पण किया और फिर अन्य महिलाओं के साथ मिल कर एक दूसरे को बधाई दी।इस अवसर पर समिति के संरक्षक दादा असीम बनर्जी, अध्यक्ष भास्कर भट्टाचार्य,जे सी विश्वास,विमल मित्रा,आनंद मुखर्जी,सुभाष बनर्जी,रतन नाग,श्रीमती मौसूमी बनर्जी,राखी मित्रा, सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे। मंदिर के आचार्य पंडित असीतवरण मित्रा ने विधि विधान से पूजा सम्पन्न कराई।

 

satna: devotion to power, this form of madam collector .... people were left on seeingक्या है सिन्दूर खेला रस्म 

बंगाली समिति कालीबाड़ी में दशमी के दिन परंपरागत ढंग से सिंदूरदान के साथ माता रानी की विदाई की गई। इस अवसर पर कालीबाड़ी में समाज के सैकड़ों परिवारों ने शामिल होकर माता के दर्शन किए और परंपरिक ढाक की धुन पर नृत्य करते हुए सिन्दूर खेला का आयोजन किया। इस आयोजन में सौभाग्यवती महिलाएं मां को सिदूर अर्पित करती है और अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद लेती है। इसके बाद सभी आपस में एक दूसरे को सिन्दूर लगाकर गले मिलते हैं और उत्साह के साथ माताजी को अगले बरस पुन: आने का आमंत्रण देते हैं। समिति के कोषायक्ष विमल मित्रा बताते हैं कि कालीबाड़ी मंदिर की नवरात्रि का बंगाली समुदाय में विशेष महत्व है। शहर में रहने वाले बंगाली समाज से जुड़ा हर व्यक्ति नवरात्रि में कालीबाड़ी मंदिर में पहुंचकर देवी पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। नवरात्रि का विसर्जन दशहरे को महिलाओं द्बारा किए जाने वाले सिदूर खेला रस्म के साथ किया जाता है। 9 दिनों के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन उनके ललाट और चरणों में सिदूर अर्पण से होता है। बाद में यही सिदूर बंगाली समाज की सुहागिनी महिलाएं अपने मांग में लगाकर परंपरा अनुसार सिदूर खेला का नृत्य करते हैं।

 

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49 वर्षो से चली आ रही परम्परा

बंगाली समाज में पुरातन काल से ही दुर्गा पूजा का विशेष महत्व रहा है। सतना शहर में दुर्गा पूजा का प्रचलन लगभग 146 वर्ष पूर्व से प्रारंभ हुआ, जो अनवरत चला आ रहा है। शहर में नवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा बंगाली समाज के अंबिका चरण बनर्जी ने वर्ष 1875 में बिहारी चौक में बंगाल शैली में बरदा माता का मंदिर का निर्माण करने के साथ शुरू किया। मुख्तयारगंज में स्वामी चौराहा के पास सन 1972 में मां काली की प्रतिमा की स्थापना कर बंगाली समाज द्बारा दुर्गा पूजा की शुरु आत की गई, जो बाद में कालीबाड़ी मंदिर के नाम से विख्यात हो गया। कालीबाड़ी मंदिर संचालन के लिए गठित बंगाली समिति के सचिव सुभाष बनर्जी बताते हैं कि कालीबाड़ी मंदिर की स्थापना सन 1976 में की गई। जबकि यहां बंगाली समाज द्बारा सन् 1962 से निरंतर बंगाली परंपरा अनुसार देवी मां की पूजा-आरााना की जा रही है। कालीबाड़ी में प्रत्येक अमावस्या की रात यहां अनुष्ठान पूर्वक अमावस पूजन-हवन इत्यादि किए जाते हैं। बंगाली परंपरा के अनुसार कालीबाड़ी मंदिर में प्रत्येक नवरात्रि में मां दुर्गा की स्थापना की जाती है। जहां भक्तजन बड़े-बड़े ढोल और जलते हुए खप्पर लेकर नृत्य कर आराधना करते हैं। महाअष्टमी को विशेष पूजा की जाती है। माता रानी को बलि के प्रतीक रू प में फल और सब्जियों की दी जाती है।

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