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प्रेम सिंह जी को कौन याद करे?

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प्रेम सिंह’ जी को कौन याद करे?

बरौंधा के बड़े देव बाबा में जन-जन के नेता स्व. प्रेम सिंह जी की स्मृति में उनके समर्थकों द्वारा उनका मन्दिर और मूर्ति बनवाई गई थी,जिसका अनावरण कल सत्रह अक्टूबर -२०२१ को नयागांव आश्रम के महन्त बद्रीप्रपन्नाचार्य जी महाराज के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम विशुद्ध गैर – राजनैतिक था, जिसमें स्व.प्रेम सिंह जी को आदराञ्जलि देने सभी लोग पहुँचे। साथ ही कार्यक्रम की सूचनालगभग सभी को पूर्व से ही दे दी गई थी। किन्तु अपने आपको प्रेम सिंह जी का उत्तराधिकारी कहने वाले चित्रकूट विधायक श्री निलांशु चतुर्वेदी जब कहीं दूर तक नजर नहीं आए। तो कार्यक्रम में ही भाँति- भाँति की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

स्व. प्रेम सिंह के चित्रकूट क्षेत्र के उनके अनन्य सहयोगी और आत्मीय रहे व्यक्ति बतलाते हैं कि – चित्रकूट के पूर्व विधायक स्व. प्रेम सिंह जी के नाम पर विधायकी की मलाई खाने वाले चित्रकूट के वर्तमान विधायक श्री निलांशू चतुर्वेदी को प्रभुता का इतना घमण्ड हो गया है कि –

वे स्व.प्रेम सिंह जी की प्रतिमा के अनावरण तक में पहुँचना उचित नहीं समझते। उन्हें प्रेम भैय्या केवल चुनाव में टिकट पाने और सहानुभूति के वोट माँगने में ही याद आते हैं।बाकी तो वे प्रेम सिंह का नाम तक लेना उचित नहीं समझते।

चित्रकूट क्षेत्र में चल रही चर्चाओं व प्रेम सिंह के करीबी माने जाने वाले अधिकाँशतः लोगों के अनुसार निलांशु को प्रेम सिंह जी कभी पसन्द ही नहीं करते थे। इतना ही नहीं निलांशु ने कई बार कांग्रेस में प्रेम सिंह के खिलाफ गुटबाजी भी चलाने का प्रयास किया था।किन्तु वे इसमें कभी सफल नहीं हो पाए

स्व.प्रेम सिंह के निधन के बाद संयोग और प्रयोग ही रहा कि  – श्री अजय सिंह राहुल के कृपापात्र होने व उनके आगामी लोकसभा चुनाव के लिए वोट बैंक का गुणा -भाग के कारण टिकट उनकी झोली में डाल दी गई। वर्ना, निलांशु को कांग्रेस से टिकट ही न मिलती।

चित्रकूट में कांग्रेस की ही ध्वजा लेकर चलने वाले कांग्रेसी यह तक आरोप लगाते हैं कि -निलांशु न तो प्रेम सिंह के विचारों को समझ पाए और न ही सिध्दान्तों को। अपनी अवसरवादी राजनीति व कांग्रेस से विधायक बनकर वे अपने आपको इतने बड़े कद  का समझने लगे हैं कि – उन्हें प्रेम सिंह याद ही नहीं रहते

हो भी क्यों न! – जब केवल प्रेम भैय्या की झूठी रट लगाने और श्री अजय सिंह राहुल भइया का कृपापात्र बनने से कांग्रेस में टिकट मिल जाती हो,तब ‘प्रेम सिंह’ जी को कौन याद करे? ऊपर से प्रेम सिंह जी के नाम पर चुनाव में वोट मिल ही जाते हैं, तो निलांशु को प्रेम सिंह का नाम लेने या उन्हें याद करने की क्या आवश्यकता है? बहरहाल, राजनीति यही होती है – जहाँ केवल स्वार्थ और अपना कद देखा जाता है!!

~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

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